श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.6.43 
सार्वभौम परिवेशन करेन आपने ।
प्रभु कहे, - मोरे देह लाफ्रा - व्यञ्जने ॥43॥
 
 
अनुवाद
जब सार्वभौम भट्टाचार्य स्वयं प्रसाद वितरित कर रहे थे, तब भगवान चैतन्य महाप्रभु ने उनसे अनुरोध किया, "कृपया मुझे केवल उबली हुई सब्जियां दीजिए।"
 
When Sarvabhauma Bhattacharya himself was distributing the prasada, Sri Chaitanya Mahaprabhu requested him, “Please give me only boiled vegetables.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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