श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 280
 
 
श्लोक  2.6.280 
भट्टाचार्येर वैष्णवता देखि’ सर्व - जन ।
प्रभुके जानिल - ‘साक्षात्व्रजेन्द्र - नन्दन’ ॥280॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य में दिव्य वैष्णव दर्शन को देखकर सभी समझ गए कि भगवान चैतन्य कोई और नहीं बल्कि नन्द महाराज के पुत्र कृष्ण थे।
 
Seeing the divine Vaishnavism of Sarvabhauma Bhattacharya, everyone could know that Chaitanya Mahaprabhu is none other than Krishna, the son of Nanda Maharaja.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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