श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 271
 
 
श्लोक  2.6.271 
प्रभु कहे, - ‘मुक्ति - पदे’र आर अर्थ हय ।
मुक्ति - पद - शब्दे ‘साक्षातीश्व र’ कहय ॥271॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "'मुक्ति-पदे' शब्द का एक और अर्थ है। 'मुक्ति-पदे' का सीधा अर्थ भगवान है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, "The word 'mukti-pade' has another meaning. 'Mukti-pade' refers to the Supreme Personality of Godhead.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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