श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  2.6.249 
उत्तम उत्तम प्रसाद बहुत आनिला ।
निज - विप्र - हाते दुइ जना सङ्गे दिला ॥249॥
 
 
अनुवाद
भट्टाचार्य भगवान जगन्नाथ द्वारा आशीर्वादित उत्तम भोजन के अवशेष बड़ी मात्रा में लाए। यह सारा प्रसाद उन्होंने अपने ब्राह्मण सेवक, जगदानंद और दामोदर को दिया।
 
Bhattacharya had brought with him a large quantity of Lord Jagannath's finest offerings. He distributed them to his Brahmin servants, as well as to Jagadananda and Damodar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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