श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.5.60 
आर केह सङ्गे नाहि, एइ सङ्गे एकल ।
धुतुरा खाओयाञा बापे करिल पागल ॥60॥
 
 
अनुवाद
"मेरे पिता के साथ इस आदमी के अलावा और कोई नहीं था। इस बदमाश ने उसे धूतुरा नाम की नशीली दवा खिलाकर मेरे पिता को पागल कर दिया।"
 
"No one else was with my father. This rascal made my father insane by feeding him Datura."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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