श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.5.32 
गोपालेर आगे विप्र कहिते लागिल ।
‘तुमि जान, निज - कन्या इहारे आमि दि ल’ ॥32॥
 
 
अनुवाद
गोपाल के सामने आकर वृद्ध ब्राह्मण ने कहा, “हे प्रभु, कृपया साक्षी दीजिए कि मैंने अपनी पुत्री इस लड़के को दे दी है।”
 
That old Brahmin came before Gopal and said, “O Lord, you are the witness that I have given my daughter to this boy.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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