श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 5: साक्षीगोपाल की लीलाएँ  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.5.102 
नूपुरेर ध्वनि शुनि’ आनन्दित मन ।
उत्तमान्न पाक क रि’ कराय भोजन ॥102॥
 
 
अनुवाद
जब गोपाल उस युवा ब्राह्मण के पीछे-पीछे चल रहे थे, तो उनके घुंघरूओं की झंकार सुनाई दे रही थी। ब्राह्मण बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने गोपाल के खाने के लिए उत्तम चावल पकाए।
 
As Gopala followed the young Brahmin, the tinkling sound of his anklets became audible. The Brahmin was overjoyed and cooked the finest rice for Gopala's offering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)