सबे व सि’ क्रमे क्रमे भोजन करिल ।
ब्राह्मण - ब्राह्मणी - गणे आगे खाओयाइल ॥84॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
वहाँ एकत्रित सभी लोग प्रसाद ग्रहण करने के लिए बैठ गए और धीरे-धीरे भोजन ग्रहण किया। सबसे पहले सभी ब्राह्मणों और उनकी पत्नियों को भोजन कराया गया।
All the people gathered there sat down to receive the offerings, and one by one, everyone took the offerings. The Brahmins and their wives were the first to be served.
तात्पर्य
वर्णाश्रम व्यवस्था के अनुसार, ब्राह्मणों का हमेशा सर्वप्रथम सम्मान किया जाता है। इसलिए उत्सव में सबसे पहले ब्राह्मणों और उनकी पत्नियों को भोजन का प्रसाद, फिर अन्य (क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) को भोजन का प्रसाद दिया गया। यह प्रणाली हमेशा से रही है, और यह भारत में आज भी प्रचलित है, भले ही वर्णवादी ब्राह्मण योग्य नहीं हैं। व्यवस्था अभी भी वर्णाश्रम संस्थागत नियमों और विनियमों के कारण प्रचलन में है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥