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श्लोक 2.4.82  |
तृण - टाटि दिया चारि - दिक् आवरिल ।
उपरेते एक टाटि दिया आच्छादिल ॥82॥ |
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| अनुवाद |
| बिस्तर के चारों ओर पुआल का गद्दा बिछाकर एक अस्थायी मंदिर बनाया गया। इस प्रकार एक बिस्तर और उसे ढकने के लिए एक पुआल का गद्दा था। |
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| A makeshift temple was created by covering the cot with mats. Thus, there was a bed and mats to cover it. |
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