श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.4.82 
तृण - टाटि दिया चारि - दिक् आवरिल ।
उपरेते एक टाटि दिया आच्छादिल ॥82॥
 
 
अनुवाद
बिस्तर के चारों ओर पुआल का गद्दा बिछाकर एक अस्थायी मंदिर बनाया गया। इस प्रकार एक बिस्तर और उसे ढकने के लिए एक पुआल का गद्दा था।
 
A makeshift temple was created by covering the cot with mats. Thus, there was a bed and mats to cover it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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