श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.4.8 
ताँर सूत्रे आछे, तेंह ना कैल वर्णन ।
यथा - कथञ्चित्क रि’ से लीला कथन ॥8॥
 
 
अनुवाद
कुछ घटनाओं का उन्होंने विस्तार से वर्णन नहीं किया, बल्कि केवल संक्षेप में बताया, और मैं इस पुस्तक में उनका वर्णन करने का प्रयास करूंगा।
 
He has not described some of the pastimes in detail, but has only given the gist of them, hence I will try to describe them in this book.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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