यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः
तत्र श्रीर् विजयो भूतिर् ध्रुवा नीतिर्मतिर् मम
" जहाँ कृष्ण हैं, सब सिद्धों में श्रेष्ठ योगेश्वर हैं| और जहाँ अर्जुन हैं, सर्वोच्च धनुर्धारी है| वही अचूक रूप से वैभव| विजय| असाधारण शक्ति और सदाचार होते हैं| यह मेरा मानना है|" (भ गी 18.78)
यदि हमारे कृष्ण चेतना आंदोलन के प्रचारक कृष्ण के निष्ठावान भक्त हैं तो कृष्ण हमेशा उनके साथ रहेंगे| क्योंकि वे अपने सभी भक्तों पर बहुत दयालु और प्रसन्न होते हैं| जैसे कि अर्जुन और कृष्ण कुरुक्षेत्र के युद्ध में विजयी हुए थे| इसी प्रकार कृष्ण चेतना आंदोलन अवश्य ही विजयी होगा| केवल यदि हम भगवान के निष्ठावान भक्त बने रहेंगे और भगवान की सेवा पहले के लोगों (छः गोस्वामी और भगवान के अन्य भक्तों) की सलाह के अनुसार करेंगे| जैसा कि नरहरि दास टक्कुर ने कहा है| : ताँदेरा चरण सेवी भक्त -सने वासा, जन्म जन्म हाय एइ अभिलाषा| कृष्ण चेतना के भक्तों को हमेशा भक्तों की संगति में रहने की चाहत रखनी चाहिए| भक्त-सने वासा : वे कृष्ण चेतना समाज या आंदोलन से बाहर नहीं जा सकते| समाज के भीतर हमें चाहिए कि चैतन्य महाप्रभु का पंथ प्रचारित करके और उनके नाम और प्रसिद्धि को पूरी दुनिया में फैलाकर पहले के लोगों की सेवा करने का प्रयास करें| यदि हम इस समाज के भीतर इस बात का गंभीरता से प्रयास करते हैं तो यह सफलतापूर्वक घटित होगा| ऐसा सांसारिक दृष्टि में कैसे होगा, इसका अनुमान लगाने का प्रश्न ही नहीं है| परंतु बिना किसी संदेह के, यह कृष्ण की कृपा से ही होता है|
