पञ्च - गव्य, पञ्चामृते स्नान कराञा ।
महा - स्नान कराइल शत घट दि ञा ॥61॥
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अनुवाद
प्रथम स्नान के बाद, पंचगव्य से और फिर पंचामृत से स्नान कराया गया। तत्पश्चात, एक सौ घड़ों में लाए गए घी और जल से महास्नान किया गया।
After the first bath, he was given a bath with Panchagavya and then Panchamrit. Then, he was given a grand bath with ghee and water brought in one hundred pitchers.
तात्पर्य
पंचगव्य के घटक दूध, दही, घी (स्पष्ट मक्खन), गाय का मूत्र और गाय का गोबर हैं। ये सभी वस्तुएँ गाय से प्राप्त होती हैं; इसलिए हम केवल कल्पना कर सकते हैं कि गाय कितनी महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्नान करने वाले देवता को उसके मूत्र और मल की आवश्यकता होती है। पंचामृत में पाँच प्रकार के अमृत होते हैं - दही, दूध, घी, शहद और चीनी। इस तैयारी का प्रमुख भाग भी गाय से प्राप्त होता है। इसे और भी स्वादिष्ट बनाने के लिए चीनी और शहद मिलाया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥