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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.4.59 
तुलसी आदि, पुष्प, वस्त्र आइल अनेक ।
आपने माधव - पुरी कैल अभिषेक ॥59॥
 
 
अनुवाद
गाँव वाले बड़ी मात्रा में तुलसी के पत्ते, फूल और नाना प्रकार के वस्त्र लेकर आए। फिर श्रीमाधवेंद्र पुरी ने स्वयं अभिषेक [स्नान समारोह] आरंभ किया।
 
The villagers brought basil, flowers and various types of clothes in abundance. Then Shri Madhavendra Puri himself started the Abhishek (bathing ceremony).
तात्पर्य
हरि-भक्ति-विलासा (छठा विलास, पद्य 30) में कहा गया है कि देवता को दही और दूध मिश्रित पानी में स्नान कराया जाना चाहिए, साथ ही शंख, घंटियां और अन्य वाद्ययंत्रों की ध्वनि के साथ मंत्र का जाप करना चाहिए "ओम भगवते वासुदेवाय नमः, साथ ही ब्रह्म-संहिता छंद का जाप भी करना चाहिए जिसकी शुरुआत "चिंतामणि-प्रकार-सदमासु कल्प-वृक्ष-लक्षावृतेषु सुरभीर अभिपालयंतम" से होती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)