श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.4.48 
ग्रामेर ईश्वर तोमार - गोवर्धन - धारी ।
कुञ्जे आछे, चल, ताँरे बाहिर ये करि ॥48॥
 
 
अनुवाद
"इस गाँव का स्वामी गोवर्धनधारी झाड़ियों में पड़ा है। आओ, हम वहाँ चलें और उसे वहाँ से छुड़ाएँ।"
 
"The lord of this village, Govardhandhari, is lying in the grove. Let's go and get him out of there."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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