श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  2.4.3-4 
नीलाद्रि - गमन, जगन्नाथ - दरशन ।
सार्वभौम भट्टाचार्य - प्रभुर मिलन ॥3॥
ए सब लीला प्रभुर दास वृन्दावन ।
विस्ता रि’ करियाछेन उत्तम वर्णन ॥4॥
 
 
अनुवाद
भगवान जगन्नाथपुरी गए और भगवान जगन्नाथ के मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने सार्वभौम भट्टाचार्य से भी भेंट की। इन सभी लीलाओं का वृंदावन दास ठाकुर ने अपने चैतन्य-भागवत ग्रंथ में अत्यंत विस्तार से वर्णन किया है।
 
Mahaprabhu went to Jagannath Puri and visited the temple of Lord Jagannath. He also met Sarvabhauma Bhattacharya. All these pastimes have been described in great detail by Vrindavan Das Thakur in his work Chaitanya Bhagavata.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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