श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.4.29 
केह अन्न मा गि’ खाय, केह दुग्धाहार ।
अयाचक - जने आमि दिये त’ आहार ॥29॥
 
 
अनुवाद
"इस गाँव में कोई भी व्यक्ति दूसरों से माँगकर खा सकता है। कुछ लोग केवल दूध पीते हैं, लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी से भोजन नहीं माँगता, तो मैं उसे उसकी सारी खाने की चीज़ें देता हूँ।"
 
"Anyone in this village can beg for food. Some people live on milk alone. But if someone doesn't ask for food, I give them everything they need."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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