श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.4.27 
पुरी कहे, - के तुमि, काहाँ तोमार वास ।
के - मते जानिले, आमि करि उपवास ॥27॥
 
 
अनुवाद
माधवेन्द्र पुरी ने पूछा, "आप कौन हैं? आप कहाँ रहते हैं? और आपको कैसे पता चला कि मैं उपवास कर रहा हूँ?"
 
Madhavendra Puri said, "Who are you? Where do you live? How did you know I was fasting?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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