vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
»
श्लोक 27
श्लोक
2.4.27
पुरी कहे, - के तुमि, काहाँ तोमार वास ।
के - मते जानिले, आमि करि उपवास ॥27॥
अनुवाद
माधवेन्द्र पुरी ने पूछा, "आप कौन हैं? आप कहाँ रहते हैं? और आपको कैसे पता चला कि मैं उपवास कर रहा हूँ?"
Madhavendra Puri said, "Who are you? Where do you live? How did you know I was fasting?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×