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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
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श्लोक 25
श्लोक
2.4.25
पुरी, एइ दुग्ध लञा कर तुमि पान ।
मागि’ केने नाहि खाओ, किबा कर ध्यान ॥25॥
अनुवाद
"हे माधवेन्द्र पुरी, मैं जो दूध लाया हूँ, उसे पी लीजिए। आप मुझसे कुछ खाने के लिए क्यों नहीं माँग लेते? आप किस प्रकार का ध्यान कर रहे हैं?"
"Oh Madhavendra Puri, please drink the milk I brought. Why don't you ask for some food to eat? What kind of meditation are you doing?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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