श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.4.20 
पूर्वे माधव - पुरीर लागि’ क्षीर कैल चुरि ।
अतएव नाम हैल ‘क्षीर - चोरा ह रि’ ॥20॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में भगवान ने माधवेन्द्र पुरी के लिए मीठे चावल का एक बर्तन चुराया था; इसलिए वे मीठे चावल चुराने वाले भगवान के रूप में बहुत प्रसिद्ध हो गए।
 
In the past, this Deity had stolen the milk pot from Madhavendra Puri, hence he became famous as the milk stealing Lord.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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