श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.4.198 
एइ श्लोक पड़िते प्रभु हइला मूर्च्छिते ।
प्रेमेते विवश ह ञा पड़िल भूमिते ॥198॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने यह श्लोक पढ़ा, तो वे तुरन्त ही अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े। वे अभिभूत हो गए और उनका स्वयं पर कोई नियंत्रण नहीं रहा।
 
Upon reciting this verse, Sri Chaitanya Mahaprabhu fell unconscious to the ground. He was distraught and beyond control.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas