श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  2.4.196 
शेष - काले एइ श्लोक पठिते पठिते ।
सिद्धि - प्राप्ति हैल पुरीर श्लोकेर सहिते ॥196॥
 
 
अनुवाद
माधवेन्द्र पुरी ने अपने भौतिक जीवन के अंत में इस श्लोक का बार-बार पाठ किया। इस प्रकार इस श्लोक का उच्चारण करते हुए, उन्होंने जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त किया।
 
During his final moments on earth, Madhavendra Puri repeatedly recited this verse. Thus, by reciting this verse, he achieved the ultimate goal of life.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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