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श्लोक 2.4.19  |
‘क्षीर - चोरा गोपीनाथ’ प्रसिद्ध ताँर नाम ।
भक्त - गणे कहे प्रभु सेइ त’ आख्यान ॥19॥ |
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| अनुवाद |
| वह विग्रह व्यापक रूप से क्षीर-कोरा-गोपीनाथ के नाम से विख्यात था, और चैतन्य महाप्रभु ने अपने भक्तों को यह कथा सुनाई कि विग्रह किस प्रकार इतना प्रसिद्ध हुआ। |
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| This Deity was famous far and wide by the name of Kshirchora-Gopinath and Chaitanya Mahaprabhu told his devotees the story of how this Deity became so famous. |
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