Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  2.4.186 
प्रगाढ़ - प्रेमेर एइ स्वभाव - आचा र ।
निज - दुःख - विघ्नादिर ना करे विचार ॥186॥
 
 
अनुवाद
"यह भगवान के प्रति प्रगाढ़ प्रेम का स्वाभाविक परिणाम है। भक्त व्यक्तिगत असुविधाओं या बाधाओं का विचार नहीं करता। वह सभी परिस्थितियों में भगवान की सेवा करना चाहता है।"
 
"This is the natural result of intense love for God. The devotee does not consider personal inconveniences or obstacles. He desires to serve the Lord under all circumstances."
तात्पर्य
जो लोग कृष्ण के लिए अत्यधिक प्रेम विकसित कर चुके होते हैं, उनके लिए व्यक्तिगत असुविधाओं और बाधाओं से अनभिज्ञ रहना स्वाभाविक है। ऐसे भक्त केवल सर्वोच्च व्यक्तिगत भगवान या उनके प्रतिनिधि, आध्यात्मिक गुरु के आदेश को निष्पादित करने के लिए दृढ़ होते हैं। सभी परिस्थितियों में, यहाँ तक कि सबसे बड़े खतरों के बीच भी, वे निरंतर सबसे बड़े दृढ़निश्चय के साथ कार्य करते हैं। यह निश्चित रूप से सेवक के प्रबल प्रेम को सिद्ध करता है। जैसा कि श्रीमद-भागवतम (10.14.8) में कहा गया है, तत ते ’नुकांपां सु-समीक्षमाणः: जो लोग भौतिक अस्तित्व के चंगुल से मुक्त होने की गंभीरता से इच्छा रखते हैं, जिन्होंने कृष्ण के लिए प्रबल प्रेम विकसित किया है, वे भगवान के घर, भगवान के पास वापस जाने के लिए योग्य उम्मीदवार हैं। कृष्ण का एक प्रबल प्रेमी किसी भी संख्या में भौतिक असुविधाओं, कमी, बाधाओं या दुख की परवाह नहीं करता है। ऐसा कहा जाता है कि जब कोई किसी पूर्ण वैष्णव में स्पष्ट दुख या संकट देखता है, तो वह उसके लिए बिल्कुल भी दुख नहीं होता है; बल्कि, यह पारलौकिक आनंद होता है। शिक्षाष्टक (8) में, श्री चैतन्य महाप्रभु ने यह भी निर्देश दिया है, आश्लिष्य वा पाडा-रतां पिनाष्टु माम। कृष्ण का प्रबल प्रेमी उसके सामने लाई गई सभी कठिनाइयों और बाधाओं के बावजूद अपनी सेवा से कभी नहीं हटता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)