पुरीर प्रेम - पराकाष्ठा करह विचार ।
अलौकिक प्रेम चित्ते लागे चमत्कार ॥178॥
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अनुवाद
चैतन्य महाप्रभु ने माधवेंद्र पुरी के प्रगाढ़ प्रेम का मानक नित्यानंद प्रभु के समक्ष न्याय हेतु रखा। चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "उनके सभी प्रेममय कार्य अपूर्व हैं।" "वास्तव में, उनके कार्यों के बारे में सुनकर आश्चर्य होता है।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked Nityananda Prabhu to give his verdict on Madhavendra Puri's example of intense love. Chaitanya Mahaprabhu said, “All his loving behavior is extraordinary. Indeed, everyone is amazed to hear of his activities.”
तात्पर्य
जब जीव कृष्ण (कृष्ण-विरह) से आध्यात्मिक अलगाव महसूस करता है, तो उसने जीवन की प्रमुख सफलता प्राप्त कर ली है। जब कोई भौतिक चीज़ों से अनासक्त हो जाता है, तो वह बस भौतिक चीज़ो के आकर्षण के दूसरे पक्ष का अनुभव कर रहा होता है। हालाँकि, कृष्ण से अलगाव महसूस करना और अपने मिशन को पूरा करने के लिए प्रभु की सेवा करना, कृष्ण के प्यार का सबसे अच्छा उदाहरण है। श्री चैतन्य महाप्रभु माधवेंद्र पुरी द्वारा प्रदर्शित कृष्ण के इस गहन प्रेम को इंगित करना चाहते थे। चैतन्य महाप्रभु के सभी भक्तों ने बाद में माधवेंद्र पुरी के नक्शे कदमों पर चलते हुए व्यक्तिगत विचारों के बिना प्रभु की सेवा की।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥