श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 174
 
 
श्लोक  2.4.174 
याँर ला गि’ गोपीनाथ क्षीर कैल चुरि ।
अतएव नाम हैल ‘क्षीर - चोरा’ करि’ ॥174॥
 
 
अनुवाद
"माधवेंद्र पुरी के कारण भगवान गोपीनाथ ने मीठे चावल का बर्तन चुरा लिया। इस प्रकार वे क्षीर-कोरा [मीठे चावल चुराने वाला चोर] के नाम से प्रसिद्ध हुए।"
 
"It was because of Madhavendra Puri that Lord Gopinath stole the pudding pot. Thus he became known as 'Ksheer-Chora'."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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