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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
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श्लोक 155
श्लोक
2.4.155
गोपीनाथ - चरणे कैल बहु नमस्कार ।
प्रेमावेशे नृत्य - गीत करिला अपार ॥155॥
अनुवाद
जब माधवेन्द्र पुरी गोपीनाथ मंदिर पहुँचे, तो उन्होंने भगवान के चरणकमलों में बार-बार प्रणाम किया। प्रेमोन्मत्त होकर वे निरन्तर नाचने और गाने लगे।
When Madhavendra reached the Puri Gopinath temple, he bowed down to the Lord's lotus feet many times. He began to dance and sing in a state of love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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