श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.4.14 
ताँर पाद - पद्म निकट प्रणाम करिते ।
ताँर पुष्प - चूड़ा पड़िल प्रभुर माथाते ॥14॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने गोपीनाथ विग्रह के चरण कमलों में प्रणाम किया, तो गोपीनाथ के सिर पर से पुष्पों का मुकुट गिरकर चैतन्य महाप्रभु के सिर पर आ गिरा।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu was paying obeisance at the lotus feet of Gopinatha Deity, the flower crown on Gopinatha's head fell on Mahaprabhu's forehead.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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