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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
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श्लोक 136
श्लोक
2.4.136
क्षीरेर वृत्तान्त ताँरे कहिल पूजारी ।
शुनि’ प्रेमाविष्ट हैल श्री - माधव - पुरी ॥136॥
अनुवाद
जब श्री माधवेन्द्र पुरी को मीठे चावल के बर्तन की कथा विस्तार से समझाई गई, तो वे तुरन्त ही कृष्ण के प्रेम में लीन हो गए।
When the story of the kheer-patra was told in detail to Madhavendra Puri, he became immersed in the joy of Krishna's love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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