माँ च यो 'व्यभिचारेण भक्ति-योगेन सेवते
स गुणान समतीत्यैतान ब्रह्म-भूयाय कल्पते
"जो सभी परिस्थितियों में अटूट रूप से भक्ति भाव से जुड़ता है, वह तुरंत भौतिक प्रकृति के तरीकों को बदल देता है और इस तरह ब्रह्म के स्तर पर आता है।"
जो भगवान की अटूट भक्ति भाव में लगा हुआ है वह पहले से ही आध्यात्मिक दुनिया में स्थित है (ब्रह्म-भूयाय कल्पते)। सभी परिस्थितियों में, कृष्ण के साथ उनकी गतिविधियाँ और व्यवहार पारलौकिक होते हैं और इस प्रकार सांसारिक नैतिकवादियों द्वारा समझ में नहीं आते हैं। इसलिए बेहतर है कि ऐसे कृत्यों पर सांसारिक लोगों के बीच चर्चा न की जाए। उन्हें हरे कृष्ण महामंत्र देना बेहतर है ताकि वे धीरे-धीरे शुद्ध हों और फिर कृष्ण की पारलौकिक गतिविधियों को समझ सकें।
