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अनुवाद
माधवेन्द्र पुरी जैसे परमहंस भगवान की प्रेममयी सेवा में सदैव संतुष्ट रहते हैं। भौतिक भूख-प्यास उनके कार्यों में बाधा नहीं डाल सकती। जब उन्होंने भगवान को अर्पित किए गए मीठे चावल का स्वाद लेने की इच्छा की, तो उन्होंने सोचा कि भगवान को अर्पित किए गए चावल को खाने की इच्छा करके उन्होंने कोई अपराध किया है।
A Paramahamsa like Madhavendra Puri is always content with his loving devotion to the Lord. Material hunger and thirst cannot hinder his activities. When he desired to eat some kheer offered to the Deity, he felt guilty for trying to eat something that was being offered to the Deity.
तात्पर्य
यह सलाह दी जाती है कि रसोई से देवता के कमरे में लाए जाने पर देवता को चढ़ाए जाने वाले भोजन को ढका जाए। उस तरह, अन्य लोग इसे नहीं देख सकते हैं। जो लोग उन्नत नियमित भक्ति सिद्धांतों का पालन नहीं करते हैं, वे भोजन खाने की इच्छा कर सकते हैं और यह अपराध है। इसलिए किसी को भी इसे देखने का मौका नहीं देना चाहिए। हालाँकि, जब इसे देवता के सामने लाया जाता है, तो इसे खोलना होगा। देवता के सामने भोजन को खुला देखकर, माधवेंद्र पूरी ने थोड़ा सा स्वाद लेने की इच्छा की ताकि वह अपने गोपाल के लिए एक समान मीठा चावल बना सकें। हालाँकि, माधवेंद्र पूरी इतने सख्त थे कि उन्होंने इसे अपराध माना। फलस्वरूप वह बिना किसी से कुछ कहे मंदिर से चले गए। इसलिए परमहंस को विजिता-षड़-गुणा कहा जाता है। उसे छह भौतिक गुणों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए - काम, क्रोध, लोभ, मोह, मात्सर्य और क्षुधा-तृष्णा (काम-वासना, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या और भूख और प्यास)।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥