श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  2.4.118 
‘गोपीनाथेर क्षी र’ बलि’ प्रसिद्ध नाम यार ।
पृथिवीते ऐछे भोग काहाँ नाहि आर ॥118॥
 
 
अनुवाद
"यह मीठा चावल दुनिया भर में गोपीनाथ-क्षीर के नाम से मनाया जाता है। दुनिया में कहीं और इसे नहीं चढ़ाया जाता।"
 
"This kheer is known throughout the world as Gopinath Ksheer. Such kheer is not offered anywhere else in the world."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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