vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
»
श्लोक 110
श्लोक
2.4.110
शान्तिपुर आइला अद्वैताचार्येर घरे ।
पुरीर प्रेम देखि’ आचार्य आनन्द अन्तरे ॥110॥
अनुवाद
जब माधवेन्द्र पुरी शांतिपुर में अद्वैत आचार्य के घर पहुंचे, तो आचार्य माधवेन्द्र पुरी में प्रकट हुए भगवान के परम प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुए।
When Madhavendra Puri reached Advaita Acharya's house in Shantipur, the Acharya was extremely happy to see Madhavendra Puri's intense love for God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×