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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
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श्लोक 91
श्लोक
2.3.91
आचार्य कहे - ये दियाछि, ताहा ना छाड़िबा ।
एखन ये दिये, तार अर्धक खाइबा ॥91॥
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने कहा, "मैंने जो कुछ तुम्हें दिया है, उसे मत छोड़ो। अब, मैं जो कुछ तुम्हें दे रहा हूँ, उसमें से आधा खाओ और आधा छोड़ दो।"
Advaita Acharya said, "Please do not leave the food I am offering. Now you can eat half of what I am offering and leave it."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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