श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.3.68 
कोन् स्थाने वसिब, आर आन दुइ पात ।
अल्प क रि’ आनि’ ताहे देह व्यञ्जन भात ॥68॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने सोचा कि तीनों भोग वितरण के लिए हैं; इसलिए उन्होंने दो और केले के पत्ते मांगे और कहा, "हमें बहुत थोड़ी मात्रा में सब्जी और चावल लेने दीजिए।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu thought that the three plates were for distribution, so he asked for two more banana leaves, saying, “Give us some vegetables and rice.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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