श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.3.56 
अन्न - व्यञ्जन - उपरि दिल तुलसी - मञ्जरी ।
तिन जल - पात्रे सुवासित जल भरि’ ॥56॥
 
 
अनुवाद
उबले हुए चावल और सब्ज़ियों के ढेर पर तुलसी के फूल रखे थे। सुगंधित गुलाब जल से भरे बर्तन भी रखे थे।
 
Basil blossoms sat atop the pile of cooked rice and vegetables. Pots filled with fragrant rose water were also placed.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd