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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.3.42 
तिन ठाञि भोग बाड़ाइल सम क रि’ ।
कृष्णेर भोग बाड़ाइल धातु - पात्रोपरि ॥42॥
 
 
अनुवाद
तैयार भोजन को तीन बराबर भागों में बाँटा गया। एक भाग भगवान कृष्ण को भोग लगाने के लिए धातु की थाली में रखा गया।
 
All the cooked offerings were divided into three equal parts. One portion was served on a metal plate to be offered to Lord Krishna.
तात्पर्य
"बढ़ाएँ" शब्द जिसका अर्थ है "बढ़ा हुआ", इस श्लोक में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एक परिष्कृत शब्द है जिसका उपयोग बंगाल में गृहस्थों द्वारा किया जाता है। जब भी भोजन तैयार किया जाता है और हम थोड़ा सा निकाल लेते हैं, तब भोजन वास्तव में कम हो जाता है। लेकिन यहाँ प्रणाली यही है कि इसे "बढ़ाई" या "बढ़ा हुआ" कहते हैं। यदि भोजन कृष्ण के लिए तैयार किया गया हो और उन्हें या वैष्णवों को चढ़ाया गया हो, तो भंडार बढ़ता है, कभी घटता नहीं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)