श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.3.36 
गङ्गाय यमुना वहे हञा एक - धार ।
पश्चिमे यमुना वहे, पूर्वे गङ्गा - धार ॥36॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने तब समझाया कि उस स्थान पर गंगा और यमुना एक साथ बहती हैं। पश्चिम की ओर यमुना है और पूर्व की ओर गंगा।
 
Advaita Acharya then explained that at that place, both the Ganges and the Yamuna flow side by side. The Yamuna is to the west, and the Ganges is to the east.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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