श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.3.34 
प्रभु कहे, - नित्यानन्द आमारे वञ्चिला ।
गङ्गाके आनिया मोरे यमुना कहिला ॥34॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब कहा, "नित्यानंद ने मुझे धोखा दिया है। वह मुझे गंगा के तट पर ले आया और बताया कि यह यमुना है।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Nityananda has deceived me. He brought me to the banks of the Ganges and told me that it was the Yamuna."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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