श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.3.25 
प्रभु कहे, - कत दूरे आछे वृन्दावन ।
तेंहो कहेन , - कर एइ यमुना दरशन ॥25॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने नित्यानंद प्रभु से पूछा कि वृंदावन कितनी दूर है, तो नित्यानंद ने उत्तर दिया, "देखो! यहाँ यमुना नदी है।"
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu asked Nityananda Prabhu how far Vrindavan was now, Nityananda Prabhu replied, “Look! Here is the Yamuna River.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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