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श्लोक 2.3.218  |
अद्वैत - गृहे प्रभुर विलास शुने येइ जन ।
अचिरे मिलये ताँरे कृष्ण - प्रेम - धन ॥218॥ |
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| अनुवाद |
| यदि कोई अद्वैत आचार्य के घर में भगवान के कार्यकलापों को सुनता है, तो उसे शीघ्र ही कृष्ण प्रेम की सम्पत्ति प्राप्त हो जाएगी। |
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| One who listens to the activities of Mahaprabhu performed in the house of Advaita Acharya, certainly immediately attains the wealth of Krishna-love. |
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