श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.3.21 
प्रभु लये याब आमि ताँहार मन्दिरे ।
सावधाने रहेन येन नौका लञा तीरे ॥21॥
 
 
अनुवाद
श्री नित्यानंद गोस्वामी ने उनसे कहा, "मैं श्री चैतन्य महाप्रभु को शांतिपुर में गंगा के तट पर ले जाऊंगा, और अद्वैत आचार्य को नाव के साथ किनारे पर सावधानीपूर्वक रहना चाहिए।"
 
Sri Nityananda Goswami told him, "I will take Sri Chaitanya Mahaprabhu to the banks of the Ganges in Shantipur. Please tell Advaita Acharya to be careful and take a boat and stay on the shore."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd