श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  2.3.208 
कभु वा तोमरा करिबे नीलाद्रि गमन ।
कभु वा आसिब आमि करिते गङ्गा - स्नान ॥208॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उनसे कहा, "कभी तुम जगन्नाथ पुरी आओगे, और कभी मैं गंगा में स्नान करने आऊंगा।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said to them, “Sometimes you will come to Jagannatha Puri and sometimes I will come to take a bath in the Ganges.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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