श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  2.3.196 
प्रभु कहे, - कर तुमि दैन्य सम्वरण ।
तोमार दैन्येते मोर व्याकुल हय मन ॥196॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने हरिदास ठाकुर को उत्तर दिया, "कृपया अपनी विनम्रता पर नियंत्रण रखें। आपकी विनम्रता देखकर ही मेरा मन बहुत व्याकुल हो जाता है।"
 
Mahaprabhu said to Haridasa Thakura, "Please control your poverty. Seeing your poverty, my mind is deeply troubled."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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