श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  2.3.173 
मातार व्यग्रता देखि’ प्रभुर व्यग्र मन ।
भक्त - गण एकत्र क रि’ बलिला वचन ॥173॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपनी माता की इतनी उत्सुकता देखी, तो वे कुछ विचलित हुए। इसलिए उन्होंने उपस्थित सभी भक्तों को एकत्रित किया और उनसे बात की।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu saw his mother's great eagerness, he became somewhat disturbed. So he gathered all the devotees present and spoke to them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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