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अनुवाद
जब भगवान कीर्तन कर रहे थे, तो उनमें सभी प्रकार के दिव्य लक्षण प्रकट हो रहे थे। वे स्तब्ध और काँपते हुए दिखाई दे रहे थे, उनके रोंगटे खड़े हो गए थे, और उनकी वाणी लड़खड़ा रही थी। चारों ओर आँसू और विनाश का भाव था।
While singing kirtan, Mahaprabhu would manifest all sorts of divine traits. He would appear stunned and trembling, thrilled, and speech would become choked. A deluge of tears would appear.
तात्पर्य
भक्तिरसामृतसिंधु में प्रलय का वर्णन आनंद और वियोग की सम्मिश्रता से हुआ है, जहाँ पर उनके कोई भी भाव नहीं दिखते। इस अवस्था में साधक भूमि पर गिर जाता है और उसके शरीर में आगे जो लक्षण पैदा होते हैं। वे लक्षण ऊपर वर्णित हुए हैं और जब वे शरीर में प्रधान हो जाते हैं तो प्रलय अवस्था हो जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥