vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
»
श्लोक 151
श्लोक
2.3.151
एके एके मिलिल प्रभु सब भक्त - गण ।
सबार मुख देखि’ करे दृढ़ आलिङ्गन ॥151॥
अनुवाद
भगवान एक-एक करके सभी भक्तों से मिले और सबके चेहरे को अलग-अलग देखकर उन्हें गले लगा लिया।
Mahaprabhu met all the devotees one by one and after looking at the face of each one, he embraced him tightly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×