श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.3.148 
तुमि याहाँ कह, आमि ताहाङिरहिब ।
तुमि येइ आज्ञा कर, सेइ त’ करिब ॥148॥
 
 
अनुवाद
"मेरी प्यारी माँ, आप मुझे जहाँ भी रहने को कहेंगी मैं वहीं रहूँगा, और आप जो भी आदेश देंगी मैं उसे पूरा करूँगा।"
 
“O Mother, wherever you tell me to stay, I will stay there and I will obey whatever orders you give.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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