रात्रि - दिने पोड़े मन सोयास्ति ना पाँ ।
याहाँ गेले कानु पाँ, ताहाँ उ ड़ि’ याँ ॥125॥
अनुवाद
"मेरी भावना ऐसी है: मेरा मन दिन-रात जलता रहता है, और मुझे चैन नहीं मिलता। अगर कोई ऐसी जगह होती जहाँ मैं कृष्ण से मिल सकता, तो मैं तुरंत वहाँ भाग जाता।"
“My feeling is this: my mind burns day and night and I get no rest at all.