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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
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श्लोक 104
श्लोक
2.3.104
सुगन्धि चन्दने लिप्त कैल कलेवर ।
सुगन्धि पुष्प - माला आ नि’ दिल हृदय - उपर ॥104॥
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री अद्वैत आचार्य ने भगवान् के शरीर पर चंदन का लेप किया और उनकी छाती पर अत्यन्त सुगन्धित पुष्पमालाएँ पहनाईं।
Sri Advaita Acharya applied sandalwood paste on the bodies of both the Lords and then placed garlands of very fragrant flowers on their chests.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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