श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.3.100 
शतेक सन्न्यासी यदि कराह भोजन ।
तबे एइ अपराध ह इबे खण्डन ॥100॥
 
 
अनुवाद
श्रील नित्यानंद प्रभु ने आगे कहा, "यदि आप कम से कम एक सौ संन्यासियों को अपने घर आमंत्रित करें और उन्हें भरपूर भोजन कराएं, तो आपका अपराध नष्ट हो जाएगा।"
 
Srila Nityananda Prabhu further said, “If you invite one hundred sannyasis to your home and feed them a full meal, your sin will be absolved.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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